Saturday, 6 December 2014

Important Information

Supreme Court has announced now that any person who meets road accidents can be taken to nearby hospital immediately.
Hospital must not  ask for police report to admit him/her, its Dr. duty to do first aid. Police can be informed later.
Please pass to all. It may help someone... to save life. Plz sent 2 all......
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Railway authorities have introduced a system where one can complain from a running train.
The SMS about complaint will be acknowledged & attended.
Give the train no, bogie no,precise nature of  complaints like
-no water in bath room/
no lights/
fan not working/
security problem etc through sms.
It is an effective tool.
The railway complaint sms
no: is 8121281212.
Please pass on this message, its very helpful
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1.  If you see children Begging anywhere in INDIA, please contact:
"RED SOCIETY" at 9940217816. They will help the children for their studies.
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2.  Where you can search for any BLOOD GROUP, you will get thousand's
of donor address. www.friendstosupport.org
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3. Engineering Students can register in www.campuscouncil.com to
attend Off Campus for 40 Companies.
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4. Free Education and Free hostel for Handicapped/Physically
Challenged children. Contact:- 9842062501 & 9894067506.
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5. If anyone met with fire accident or people born with problems in
their ear, nose and mouth can get free PLASTIC SURGERY done by
Kodaikanal   PASAM Hospital.
By German
Doctors. Everything is free. Contact : 045420-240668, -245732 "Helping
Hands are Better than Praying Lips"
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6. If you find any important documents like Driving license, Ration
card, Passport, Bank Pass Book, etc., missed by someone, simply put
them into any near by Post Boxes. They will automatically reach the
owner and Fine will be collected from them.
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8.  It costs 38 Trillion dollars to create OXYGEN for 6 months for all
Human beings on earth.
"TREES DO IT FOR FREE"
"Respect them and Save them"
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9.   Special phone number for Eye bank and Eye donation: 04428281919
and 04428271616 (Sankara Nethralaya Eye Bank). For More information
about how to donate eyes plz visit these sites. http://ruraleye.org/
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10.  Heart Surgery free of cost for children (0-10 yr) Sri Valli Baba
Institute Banglore. 10. Contact : 9916737471
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11. Medicine for Blood Cancer!!!!
'Imitinef Mercilet' isa medicine which cures blood cancer. Its
available free of cost at "Adyar Cancer Institute in Chennai". Create
Awareness. It might help someone.
Cancer Institute  in Adyar, Chennai
Category:  Cancer
Address:
East Canal Bank Road, Gandhi Nagar
Adyar, Chennai -600020
Landmark: Near Michael School
Phone:  044-24910754  044-24910754 ,  044-24911526  044-24911526 ,
044-22350241  044-22350241
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AND LETS TRY TO HELP INDIA BE A BETTER PLACE TO LIVE IN
Please Save Our Mother Nature for
"OUR FUTURE GENERATIONS"
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Wednesday, 3 December 2014

आतंकवाद का अर्धसत्य

राष्ट्रपति के कुछ कहने का क्या कानूनी महत्त्व
होता है? क्या सूचनाओं और प्रशासनिक
कार्रवाइयों को लेकर राष्ट्रपति की टिप्पणियों से
राज्यतंत्र पर असर होता है? क्या प्रचार-तंत्र
राष्ट्रपति के तजुर्बे को सुनने के बाद किसी विषय
को लेकर अपने अभियान के लिए कोई
मर्यादा निर्धारित करता है? ये प्रश्न इसलिए
जरूरी लगते हैं कि राष्ट्रपति को राजनीतिक तौर पर
निरपेक्ष माना जाता है। राष्ट्रपति संविधान के
प्रमुख हैं और संविधान के उद््देश्यों और भावनाओं
के ही अनुरूप पूरे तंत्र को विकसित करने
का दावा और वकालत की जाती है। इन
प्रश्नों की पड़ताल राष्ट्रपति के तेरह अक्तूबर
को समाचारपत्रों में छिटपुट तरीके से छपे एक
साक्षात्कार के बहाने करने की कोशिश कर सकते
हैं। राष्ट्रपति ने नार्वे के पत्रकारों से बातचीत में
कहा कि यह देश की खुशकिस्मती है कि पंद्रह
करोड़ की मुसलिम आबादी में शायद ही कोई
मुसलिम आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो।
आंतरिक स्तर पर आतंकवादी गतिविधियां न के
बराबर हैं।
पिछले दो-ढाई दशक के दौरान धर्म-विशेष से जोड़
कर आतंकवादी गतिविधियों की जो तस्वीर पेश
की जाती रही है, राष्ट्रपति ने एक तरह से
उसका प्रतिवाद किया है। लेकिन इसके साथ यह
भी सच है कि इन वर्षों में धर्म-विशेष से
आतंकवाद को जोड़ा जाता रहा है। इससे समाज में
एक आंतरिक विभाजन का मानस तैयार हुआ है।
विश्वास के पुल कमजोर हुए हैं और अविश्वास
बढ़ा है। राजनीति की दशा-दिशा के निर्धारण में
आतंकवाद के इस प्रकार के चित्रण ने खासा असर
डाला है।
सैकड़ों की तादाद में पढ़े-लिखे, मध्यम वर्ग के
मुसलिम युवकों को बरसों तक जेल की सलाखों में
रहना पड़ा है। उनमें से अधिकतर के खिलाफ
आरोप साबित नहीं हो पाए और अदालतों ने उन्हें
बेगुनाह मानते हुए रिहा कर दिया। लेकिन ज्यादातर
मामलों के निराधार साबित होने के बावजूद एक
पूरी पीढ़ी कामानस तैयार करने में इन तमाम
घटनाक्रमों की भूमिका रही है।
राष्ट्रपति की संक्षिप्त टिप्पणी के आलोक में
आतंकवादी गतिविधियों के विभिन्न पहलुओं
की पड़ताल की जानी चाहिए। क्या इस तरह
का संदेश समाज में व्यापक स्तर पर पहुंच
पाता है? या यह माना जाए कि किसी खास
प्रयोजन से जुड़े घटनाक्रम के लगातार चलने वाले
सिलसिले को नहीं रोक पाने की स्थिति में समाज में
जैसा वातावरण तैयार हो जाता है उससे समाज इस
तरह के संदेश को स्वीकार करने की स्थिति में
नहीं रह जाता है? संदेश के देने और उसे स्वीकार
करने की स्थितियों के पीछे एक सिद्धांत काम
करता है। इसकी पड़ताल इस रूप में
की जा सकती है कि राष्ट्रपति का यह वक्तव्य
उन समाचारपत्रों में लगभग न के बराबर प्रकाशित
हुआ जो कि धर्म विशेष से जोड़े गए आतंकवाद
को लेकर तरह-तरह की सामग्री प्रमुखता से छापते
रहे हैं। टीवी चैनलों के लिए भी यह
टिप्पणी अप्रासंगिक सामग्री की तरह थी।
अपने यहां आतंकवाद के दो पहलू प्रस्तुत किए
जाते हैं। एक, पड़ोसी इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान
से प्रायोजित आतंकवाद, और दूसरा, उसका देश में
इस्लाम को मानने वालों से जुड़ाव। पाकिस्तान
द्वारा हमारे यहां हिंसा और उपद्रव फैलाने के लिए
उकसाने और मदद करने के आरोप दोनों देशों के
बीच विभाजन की रेखा खिंचने के साथ ही शुरू
हो गए थे। हिंसा और अशांति के लिए पाकिस्तान
की भूमिका के आरोप की जगह आतंकवाद के
आरोप ने पिछले कुछ वर्षों में ली है। यह
भी कहा जा सकता है कि अमेरिका ने विश्व-स्तर
पर आतंकवाद के विस्तार की जो तस्वीर पेश की,
उसी से पुराने आरोपों की जगह नए आरोप ने ले
ली। यह हिंसा और उपद्रव में मददगार बनने में
चरित्रगत बदलाव का भी सूचक है।
मगर अपने यहां आतंकवाद के विस्तार को इस रूप
में प्रचारित किया गया है मानो आंतरिक तौर पर
भी उसे कहीं से समर्थन और सहयोग मिल
रहा हो। इसका कोई ठोस आधार नहीं है। दरअसल,
यह प्रचार पाकिस्तान के एक इस्लामी राष्ट्र होने
और अपने यहां इस्लाम को मानने
वालों की मौजूदगी के दो अलग-अलग
तथ्यों को एक रिश्ते की तरह पेश करता है। यह
भ्रम का निर्माण है, सच्चाई को समझना नहीं।
पाक प्रायोजित आतंकवाद से रणनीतिक स्तर पर
निपटने का दावा किया गया है। लेकिन इसके साथ
जो महत्त्वपूर्ण बात है वह यह कि सीमापार के
आतंकवाद के साथ आंतरिक जुड़ाव के आरोप में
इतनी ज्यादा कार्रवाइयां की गई हैं
कि उनका सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर हुआ
है। उससे देश की राजनीतिक गतिविधियां प्रभावित
हुई हैं और राजनीतिक सरोकारों के चरित्र में
बुनियादी बदलाव आया है।
राजनीतिक सरोकारों का बदलना प्रशासनिक और
न्यायिक तंत्र की कार्रवाइयों में भी परिलक्षित
होता है। दूसरे शब्दों में कहें कि प्रशासनिक और
न्यायिक तंत्र का राजनीति के लिए इस्तेमाल
किया जा सकता है या राजनीतिक
सरोकारों को बदलने के लिए प्रशासनिक और
न्यायिक तंत्र का। आंतरिक स्तर पर आतंकवाद के
संकट के बहाने पूरे देश की तस्वीर बदल गई है।
मनमोहन सिंह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए
सबसे बड़ा खतरा माओवाद को बताते रहे। उनके
इस तरह के बयान खासकर तब आए, जब यूपीए
सरकार को लग रहा था कि खनिजों के दोहन
का काम अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश में अवैध खनन
कितने बड़े पैमाने पर होता रहा, क्या वे इससे
अनजान थे? अवैध खनन की जांच के लिए
सर्वोच्च न्यायालय की पहल पर गठित हुई
समिति की रिपोर्ट बताती है कि यह सब
आला अधिकारियों के जानते-बूझते हुआ और इसमें
अनेक राजनीतिकों की भी मिलीभगत थी।
राष्ट्रपति ने जो अपनी राय जाहिर की है उसके
पीछे आतंकवाद के प्रचार, देश में
उसकी जमीनी हकीकत, आतंकवाद की कथित
घटनाओं और गतिविधियों से जुड़ी जांच, तथ्य
आदि रहे होंगे। लेकिन कानून के तंत्र पर इस तरह
के वक्तव्य का कोई असर इस रूप में
नहीं हो सकता है कि भविष्य में उसके काम करने
का ढर्रा बदल जाए। ऐसे बहुत-से मामले हैं जिनमें
अदालतों ने आतंकवाद के
आरोपों को झूठा पाया और आरोपियों को रिहा कर
दिया। साथ में पुलिस को फटकार भी लगाई। पर
इससे कानून के काम करने के ढंग में क्या कोई
बदलाव आ सका है?
यह दावा किया जाता है कि संसदीय लोकतंत्र के
सभी स्तंभों की अपनी स्वायत्तता है और इनसे
एक संतुलन की स्थिति बनाए रखने
की अपेक्षा की जाती है। लेकिन यह
स्वायत्तता संतुलित है या किसी तरफ झुकी हुई
भी है? झुकी हुई है तो किस तरफ?
स्वायत्तता का अर्थ इस रूप में भी होता है
कि एक विशेष आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक
धारा के लिए मौके की नजाकत समझते हुए
विभिन्न स्तंभों में से एक खुद को अगुआई के लिए
प्रस्तुत कर देता है। मसलन, जो सीधे तौर पर
विधायिका नहीं कर सकती वह न्यायालय के जरिए
हो सकता है। जो न्यायालय नहीं कर सकता उसे
कार्यपालिका कर सकती है और एक खास तरह के
पूर्वग्रहों के पक्ष में माहौल बना सकती है।
एक अध्ययन किया जाए कि बाहरी या पाक
प्रायोजित आतंकवाद के लिए आंतरिक तौर पर
किसके निशाने पर कौन होता है तो यह बात
स्पष्ट हो सकती है कि प्रायोजित आतंकवाद से
निपटने का मकसद अपेक्षया कम सक्रिय है।
मनमोहन सिंह ने आंतरिक आतंकवाद को सबसे बड़े
संकट के रूप में प्रस्तुत किया था।
जबकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की टिप्पणी एक
बहु-प्रचारित धारणा के प्रति आगाह करती है।
लेकिन इसका असर वैसा नहीं देखा जा सकता है
जैसा एक राष्ट्राध्यक्ष के किसी संदेश
का होना चाहिए। वास्तव में राष्ट्राध्यक्ष के
भी किसी वक्तव्य का इस्तेमाल राजनीतिक,
सामाजिक और आर्थिक आधार पर ही होता है।
समाज और राजनीति में जिस वर्ग और विचार
का बोलबाला होता है वह अगर अनुकूल है
तो संदेश असरकारी होता है, वरना संदेश
दबा दिया जाता है।
आतंकवाद की समस्या का सिरा अंतरराट्रीय
संबंधों पर टिका हुआ है। अमेरिका भले यह
कहता हो कि पाकिस्तान आतंकवाद के एक केंद्र
के रूप में दिखाई दे रहा है, जैसा कि हाल में
पेंटागन की एक रिपोर्ट में कहा गया है, लेकिन
इसके साथ-साथ क्या यह भी उतना ही सच नहीं है
कि आतंकवाद से निपटने के नाम पर
अमेरिका अपने आर्थिक और रणनीतिक हित
साधता रहा है। अमेरिका की यात्रा में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ
आपसी सहयोग के समझौते किए।
यह आतंकवाद आंतरिक और बाहरी आतंकवाद के
रूप में परिभाषित नहीं है। जिन देशों के साथ नए
किस्म के रिश्ते बन रहे हैं उनमें आतंकवाद के
खिलाफ सहयोग और समझौते प्रमुख होते हैं।
इजराइल भी इनमें शामिल हैं। क्या यह महज पाक
प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए है?
काफी समय से हिंदुत्ववादी संगठन यह प्रचार करते
रहे हैं कि मदरसे आतंकवाद के अड््डे हैं।
वहां जिहाद सिखाया जाता है और देश-
विरोधी गतिविधियां होती हैं। योगी आदित्यनाथ ने
हाल में उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों के समय
भाजपा के लिए प्रचार करते हुए अनेक बार
कहा कि मदरसे दंगाइयों और आतंकवादियों के
प्रशिक्षण केंद्र की तरह काम कर रहे हैं। लेकिन
मदरसों के बारे में खुद खुफिया एजेंसियों की पिछले
दिनों आई रिपोर्ट ने ऐसे दुष्प्रचार का जवाब दे
दिया है। केंद्र सरकार को सौंपी गई इस रिपोर्ट ने
मदरसों में जिहाद सिखाए जाने के आरोप को सिरे
से खारिज कर दिया है।
राष्ट्रपति के वक्तव्य का वह
हिस्सा ही महत्त्वपूर्ण बना जो कि निर्यात किए
जाने वाले आतंकवाद को लेकर था। देश के भीतर
मुसलिम समुदाय के बारे में उनका कथन हाशिये पर
डाल दिया गया। इससे लगता है कि आतंकवाद
को खास तरीके से परिभाषित करने और इस तरह
एक खास किस्म का माहौल बनाने
का जो सिलसिला चला आ रहा है वह पहले
की तरह जारी रह सकता है। राष्ट्रपति के इस
तरह के वक्तव्यों के आंतरिक महत्त्व वाले हिस्से
को प्रभुत्वशाली वर्ग महसूस
नहीं करना चाहता है। ऐसा महज संयोगवश
होता है या किसी विषय पर विमर्श की दिशा तय
करने का एक ढांचा बना हुआ है, जिसमें आतंकवाद
के सच का आधा हिस्सा ही बहस पर
हावी दिखता  
http://www.jansatta.com/politics/half-true-of-terrorism/5401/

Mystery Continues Over 4 Kalyan Youth किया है कहानी?

किया है कहानी?
 आईएसआईएस के लिए 'जंग लड़ने' इराक गए आरिफ माजिद  से एनआईए की पूछताछ में कई अहम 'जानकारियां' मिली हैं। एनआईए अब उसका नार्को टेस्ट कराने की योजना बना रही है। शुक्रवार को गिरफ्तार किए जाने के बाद 8 दिसंबर तक के लिए रिमांड में भेजे गए आरिफ ने बताया है कि आईएसआईएस तक पहुंचने के लिए उसने 20 हजार से ज्यादा वेबसाइट्स को खंगाला। एक अंग्रेजी अखबार ने आरिफ द्वारा एनआईए को दी गई जानकारी को सूत्रों के हवाले से प्रकाशित किया है। जानें, कैसा इराक पहुंचा और वहां से वापस लौटा आरिफ
ऐसे हुई शुरुआत
आरिफ और उसके 6 दोस्त शाम की नमाज के वक्त मस्जिद पर इकट्‌ठे होते थे और वहां ज्यादा समर्पित मुसलमान बनने के तरीकों के बारे में चर्चा किया करते थे। आरिफ ने इस मकसद को पूरा करने के लिए वेबसाइट्स सर्च करने शुरू किए। इस दौरान, उसे आईएसआईएस के बारे में पता चला और वह इस संगठन से काफी प्रभावित हुआ। इसके बाद, आरिफ आईएसआईएस से संपर्क करने की कोशिश करने लगा। आखिरकार एक वेबसाइट पर उसे अपने काम का एक नंबर मिल ही गया। आरिफ ने बताया कि इस नंबर को पाने के लिए उसने 20 हजार से ज्यादा साइट्स खंगाले।
आईएसआईएस से मिला लोकल कॉन्टैक्ट
इस नंबर पर बातचीत करने के बाद आरिफ को कल्याण के पास भिवंडी के रहने वाले एक शख्स का नंबर मिला। इसके बाद, आरिफ ने यह सारा घटनाक्रम अपने दोस्तों को बताया। फहाद शेख, अमन टंडेल और शाहीन टंकी उसके साथ इराक जाने के लिए तैयार हो गए। भिवंडी के लोकल कॉन्टैक्ट ने आरिफ को यात्रा के लिए जरूरी रकम देने के लिए हामी भरी। इसके बाद, ये सभी राहत ट्रेवेल्स नाम की ट्रेवेल एजेंसी के संपर्क में आए। इस एजेंसी ने इनके इराक जाने का बंदोबस्त किया। इराक के हालात उस वक्त तक काफी बिगड़ चुके थे, इसलिए इन्होंने बहाना बनाया कि वे तीर्थयात्रा पर जा रहे हैं।
लोकल कॉन्टैक्ट ने दी ढाई लाख से ज्यादा की रकम
लोकल कॉन्टैक्ट से मिले पैसों से 60 हजार रुपए प्रति यात्री के हिसाब से पेमेंट करने के बाद ये चारों इराक के लिए 25 मई के लिए निकले। आरिफ ने दक्षिणी मुंबई के डोंगरी स्थित अजमेरी टूर्स एंड ट्रेवेल से वीजा और अन्य दस्तावेज हासिल किए। चारों कल्याण से अलग-अलग घर से निकले और लोकल ट्रेन से मुंब्रा स्टेशन पहुंचे। मुुंब्रा में भिवंडी के लोकल कॉन्टैक्ट ने उन्हें और पैसे दिए। इसके बाद, ये चारों मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे और इत्तिहाद एयरलाइंस की फ्लाइट से अबू धाबी पहुंचे। अबू धाबी से ये इराक गए। 27 मई को कर्बला, फिर 30 मई को बगदाद पहुंचे। यहां तक वे तीर्थयात्रियों के साथ आए थे। 31 मई को ये स्थानीय बाजार में गए और वहां से अपने लोकल गाइड को धता बताते हुए फरार हो गए।
मिला साफ सफाई और महिलाओं की पहरेदारी का काम
आरिफ के दोस्त शाहीन टंकी को आईएसआईएस के एक शख्स का फोन आया और उसने उन्हें फल्लुजाह से टैक्सी हायर करने को कहा। यह जगह मोसुल के काफी करीब है। मोसुल में ही 40 भारतीय मजदूरों को अगवा किया गया था। मोसुल पहुंचने के बाद इन्होंने इराकी संपर्क से कॉन्टैक्ट किया। उसकी मदद से आईएसआईएस के हिंद कैंप पहुंचे। इस कैंप ने उन्हें आईएसआईएस की विचारधारा, मिशन आदि के बारे में जानकारी दी गई। यहीं पर इनका ब्रेनवॉश किया गया। इसके बाद इन्हें ट्रेनिंग कैंपों में भेज दिया गया। यहां इन्हें बताया गया कि आईएसआईएस चीफ बगदादी भारतीय पुरुषों को जंग के लिहाज से बेहद कमजोर मानता है और उन्हें मैदान ए जंग में नहीं भेजा जाएगा। यहां सिर्फ शाहिद टंकी ही शारीरिक परीक्षा पास कर पाया, जिसके बाद उसे हथियारों की ट्रेनिंग दी गई। आरिफ समेत बाकी तीन को आईएसआईएस के सोशल मीडिया टीम में भेज दिया गया। इसके अलावा, इन्हें सफाई, पानी भरने और बंधक बनाई गई महिलाओं की पहरेदारी काम दिया गया।
जंग लड़ने की मनाही पर भड़का आरिफ
आरिफ को जंग के मैदान में जाने पर मनाही थी। इस बात को लेकर उसे काफी कोफ्त होती थी। यहीं से उसका मूड बदलना शुरू हुआ। उसने देखा कि कुरान की नसीहतों का आईएसआईएस का कोई लेनादेना नहीं है। अातंकी लोगों की बेरहमी से कत्ल कर रहे थे और महिलाओं के साथ बलात्कार। जल्द ही ये चारोें अवसाद के शिकार हो गए। जिस जिहादी जन्नत का सपना लेकर वे गए थे, वो नर्क में तब्दील हो चुका था। जुलाई में आरिफ फायरिंग में घायल हो गया। उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई क्योंकि कैंप में इलाज या खानेपीने की समुचित सुविधा नहीं थी। आरिफ ने किसी तरह अपने आकाओं को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वे उसे इलाज के लिए तुर्की जाने दें। तुर्की पहुंचने के बाद उसने अपने परिवार से संपर्क किया। इसके बाद आरिफ के पिता ने गृह मंत्रालय को जानकारी दी और उसे वहां से लाने का इंतजाम किया गया।

Mystery Continues Over 4 Kalyan Youth
Four Kalyan youth, who had gone missing since May 23 and alleged by the Indian security agencies to have gone to Iraq for taking up arms alongside Islamic State, are now reported to have called their parents seeking arrangement for return.
According to reports, 26 November, Kalyan is a bustling city in neighbouring Thane district. Incidentally, one of the youth’s father, claimed he did not give any statement to the NIA.
Union Home Ministry sources have claimed that the four youth – Aman Tandel, Fahad Shaikh, Arif Majeed and Sahim Tanki – had reportedly gone to the war torn countries – Iraq and Syria. Mumbai police, including the ATS, and the national security agencies, which were investigating the whereabouts, had claimed that the youth had joined the Islamic State in Iraq and the Levant (ISIL).
Missing Kalyan Youths reportedly in Iraq
“We have information that the three other youth from Kalyan, who had also gone to Iraq to fight alongside IS fighters, also want to come back, though their families are yet to get in touch with the government or its agencies as in the case of Arif. His father Ejaz Majeed has sought help from the National Investigation Agency’s (NIA) sleuths. It may be the case that these youth are yet to come out of the fighting zone as Arif managed to flee from there,” Hindustan Times quoted the Home Ministry official requesting anonymity.
Even the Times of India quoted a senior intelligence officer, who said, “All four are in touch with their families here and sought facilitation for rescue and return. However, only Arif's family has contacted the NIA office in Mumbai and sought the intervention of the Centre to bring him back.”
This latest report from the Home Ministry sources contradicts the Indian security agencies claim earlier in September when it had gone on record to say one of these youth Arif Majeed has been killed in Mosul while fighting for Islamic State in Iraq.
It was reported that a militant website isaba.tk had eulogized Arif’s death terming it to be martyrdom and had called upon India’s Muslims to learn from Arif’s struggle. But now the ministry and intelligence sources are claiming that Arif Majeed is indeed alive and contacted his father Dr Ejaz Majeed urging him to facilitate for his return to India.
As reported, the authoritative government sources have said that Ejaz Majid had met senior NIA officers last Thursday in Mumbai and told them he had received a phone call from a mobile. It was his son Arif, who told him he had fled from IS-controlled areas to Turkey after fighting for the militant group, for nearly three months.
Incidentally, father of Dr Ejaz Majeed Arif – reported by security agencies in the past to have been killed – has told Kalyan police that he has not given any such statement to NIA officials, who are claiming that Arif asked for government’s help in bringing him back.
Hypothetically, if these youths are brought back to India and even if it was established that they indeed joined IS in its fighting then also it would not be possible for the Indian agencies to prosecute them under Indian penal code for terrorism activities or Unlawful Activities Prevention Act as Islamic State is not a terrorist organization as listed in the official gazette of the country.
A senior intelligence official, who spoke with ToI, conceded that the government is willing to take a sympathetic view on the matter but it was virtually impossible to negotiate the return of a person associated with a globally proscribed outfit. “Besides, who do we talk to about the return of the Kalyan youth still in the ISIS zone ...Who will go there to seek them out?” wondered the official.
A couple of months before, the Central agency has reported that it had verified information that Fahad Shaikh is working in an oil refinery and Saheem Tanki in a hospital in the Syrian city of Rakka but intelligence could not gather information about Arif Majeed and Aman Tandel.
Despite such conflicting reports in the media but the dilemma still exists over the fate of these four youths for which neither the family nor investigation agencies have any clear proof to ascertain destiny of the missing youths.

ISLAMIC NAMES

ISLAMIC NAMES
BOYES LADKO KE ISLAMI NAAM

www.deeneefiza.blogspot.in/2014/11/islamic-name-of-boys.html?m=1
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GIRLS LADKIYO KE ISLAMI NAAM

www.deeneefiza.blogspot.in/2014/11/islamic-names-of-girls.html?m=1
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ذھن بنانے کی کوشش

آج کا ٹائمز آف انڈیا ملاحظہ کیجئے اور اخبارات میں اھل وطن کا جو
ذھن بنانے کی کوشش چل رھی ھے، اس کا نمونہ پڑھ لیجئے، وہ لیڈران جو
قوموں کے ٹرننگ پوائنٹ کو ملحوظ اور محفوظ رکھتے ھیں،
ضرور اس کا تراشہ کاٹ کے تاریخ کی فائل میں رکھ لیں۔

خبر عبدالرحمن انتولے کے انتقال پر شائع ھوئ ھے، عنوان ھے کہ"سیمنٹ  گھوٹالہ کے متنازع لیڈر کا انتقال" ۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
میں سوچ رھا ھوں کہ آئندہ کل کسی کی موت پر ٹائمز آف انڈیا یوں لکھے گا
گودھرا کے خونی کی موت
رتھ یاترا اور بھاجپ کے رسوا لیڈر کی موت
وغیرہ وغیرہ
مکمل خبر میں مسلم لیڈر کی رٹ لگائ گئی ھے، جبکہ مرحوم نے کبھی بھی خود کو مسلم    چہرہ کے طور پر پیش نھیں کیا ، بلکہ یہ وہ عھد تھا جب لوگ اپنے سیاسی اعتقادات کی پختگی اور تجربے سے اعلی عہدوں تک پہنچتے تھے، لوگ مذھب کی طرح پارٹی لائن کی خاطر جان نچھاور کرتے تھے۔
پورے تبصرہ میں انتولے مرحوم کو فرقہ پرست بتایا ھے، یہ نھیں لکھا کہ موصوف نے اپنے گھر کے سامنے شیواجی کا پتلا نصب کیا،اور یہ کہ موصوف شیو سینا کے مجمع میں فصیح مراٹھی ہی میں خطاب کرتے تھے، پھر ٹائمز یہ کیسے بھول گیا کہ پولس فورس کو پتلون انتولے نے پہنائی ، پہلے یہ بندے نیکر پہنتے تھے۔
یار،ایک چیز ہر مسلم لیڈر کو باور کرنا چاہئے کہ وہ اصولی سیاست پر عمل کریں، چاپلوسی سے پرھیز کریں، مولانا آزاد کی طرح قومی خدمات انجام دیں، اس سے ان کا دھرم اور راج دھرم
ساتھ ساتھ چلیں گے۔
بصورت دیگر ٹھیکرے اور ٹھیکے حاصل کرنے کیلئے مکمل طور سے بے ایمان ھونا پڑے گا، جسطرح مختار نقوی اور شھنواز حسین پرلے درجے بنے ھوئے ھیں۔
کیوں کہ اللہ نے  قران میں حق فرمایا ہے.
ولن ترضی عنک الیھود والنصاری حتی تتبع ملتھم۔۔۔۔۔

خاتمہ بالخير کا عجیب نسخہ

حکیم الامت حضرت مولانا اشرف علی تهانوی رحمة الله عليه سے
کسی نے پوچھا
که خاتمہ بالایمان کا کامیاب نسخہ
بتلائیے.
آپ نے فرمایا "ایمان موجوده"،
"ایمان حاصلہ"پرشکر کرتے رهو
ایمان بڑهتا رهے گا، ایمان بڑهتا رهے گا،
عین رخصتی کے وقت زندگی بهر سے زیاده ایمان هوگا
مراقی الفلاح جو فقہ کی مشہور
ومعروف کتاب هے اس میں ایک
حدیث ہے.
قال النبی ﷺ من صلی رکعتی
الفجر ای سنة فی بیت یوسع له
فی رزقه یقل المنازع بینه وبین
اهله ویختم له بالایمان.
او کما قال النبی ﷺ
حضور اکرم ﷺ نے ارشاد فرمایا
که جو شخص فجر کی دو رکعت
سنت اپنے گھر میں پڑهے تو اس
کے رزق میں وسعت کردی جائے
گی اسکے اور اسکے گھر والوں
میں منازعات ( جھگڑے ) کم
هوجائیں گے اور اس کا خاتمه
ایمان پر هوگا.
سبحان الله
"یا الله همیں خاتمہ بالخير کی
دولت سے مالامال فرمادیجیئے."
حوالہ از رساله
سہ ماہی حکیم الامت
صفحه نمبر 11

बेचारा पत्रकार

मीडिया इन दिनों सबके निशाने पर है....नेता हो या नौकरशाह...आम हो या खास...सब उपदेशक की भूमिका में हैं...पत्रकार होना मानो पाप हो गया हो.....मैं इस बात से कतई इंकार नहीं करता कि पत्रकारिता का पाक पेशा मैला नहीं हुआ.....पर क्या इस गंदगी के लिए जिम्मेदार महज बेचारा पत्रकार ही है जो उसे इस घ्रणित नज़रिये से देखा जाने लगा.....मोदी समर्थक केजरीवाल को हीरो बनाने के लिए मीडिया को पानी पी पी कर कोसते रहे ....और अब जब मोदी दिख रहे हैं तो केजरीवाल मीडिया को बिका हुआ करार दे रहे हैं......मतलब हमारे लिए करे तो अच्छा नहीं तो थू थू.....बेचारा पत्रकार ...जी हाँ, वो ही सक्श जो जंगल में लगी आग को भी ऐसे कवर करता हैं मानो उसका घर जल रहा हो.....दुर्घटना में घायल को मदद ना पहुचे तो ऐसे चिल्लाता हैं मानो उसके अपने की सांस जा रही हो...और हाँ इन सबके बीच कुछ ढीट नौकरशाहो की व्यंग्य भरी नजर कि उनके आराम में खलल डालने की गुस्ताखी क्यूँ की गयी । सब झेल कर किसी पर एहसान नहीं करता वो अपितु अपने काम को अंजाम देने की एक छोटी सी कोशिश करता है उतनी ही छोटी सैलरी में.....कुछ चालबाज नौकरशाह और नेताओ की राजनीति का शिकार वो कब बन जाता है इसका उसको कई बार तो एहसास ही नहीं होता.....फिर भी उसकी अधिकतम कोशिश यही रहती है की ग़लती से भी ग़लती ना हो......हैरानी इस बात पर ज्यादा होती हैं कि पत्रकार की कमीज हर हाल में साफ़ रहे हमारी चाहे कैसी भी हो....ना ना  मैं नेताओ की तरह दूसरे को मैला कर पत्रकार को उजला नहीं कहलवाना चाहता......पर दोस्तो पत्रकार आसमान से भेजे फरिश्ते नहीं होते...वे भी इसी समाज से आते हैं और वो कहावत हैं ना की बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए.....आसपास के वातावरण का असर पत्रकार पर भी हुआ हुआ है ये एक कड़वा सच है पर हर पल महज  आलोचना समाधान नहीं हो सकता । पेड न्यूज़ है सही है पर उसे रोकेगा कौन....निसंदेह आप और हम ! केवल पत्रकार नहीं रोक सकता...ये सच है कड़वा सच उसके लिए आपको रास्ता खोजना होगा..घाव को महज कुरेदने से वो ठीक नहीं हो सकता उसे दवा से ही ठीक किया जा सकता है....तेजपाल गलत है तो प्रभाष जी की सच्चाई नहीं छीनी जा सकती.....पेज थ्री की खबरों पर फोकस का आरोप झेलने वाले इसी मीडिया ने जेसिका के हत्यारों को अपनों की चुप्पी के बाद भी बेनकाब किया था....ना बिका था मीडिया ना डरा था मीडिया... आपात काल में भी कुलदीप नायर जैसे लोगो की कलम की स्याही ना खरीदी जा सकी ना उड़ेली जा सकी....चाहे 2जी, कॉमनवेल्थ, वाड्रा जमीन हो या कोलगेट घोटाला हो.......जाने कितने अनगिनत किस्से हैं ऐसे..... बस तब उस पत्रकार के साथ अनगिनत लोगो का हौसला होता था कि वो लड़ जाता है व्यवस्था से भी और अपने मीडिया हाउस से भी....मानता हूँ हमारी बिरादरी के कुछ लोगो से गलतियाँ हुई हैं पर उसके लिए पूरी जमात को सजा ना दीजिये.......ये बात पत्रकार के लिए कितनी नुकसान दायक है पता नहीं पर व्यवस्था के लिए घातक हैं .....लोकतंत्र के घोषित तीन स्तंभों की हालत किसी से छिपी नहीं है औbर अब यदि इस अघोषित चौथे स्तंभ का हाल भी ये हुआ तो दोस्तो परिवर्तन के लिए ये इंतजार कही इंतजार बन कर ना रह जाए.......सोशल मीडिया के मित्रो कम से कम आप तो समझिये इस व्यथा को....सैयद मोईन दैनिक लोकसंग्रह मोती कारंजा औरंगबाद  M,S